अध्याय 6 47 कुल श्लोक

ध्यान योग (आत्मसंयम)

ध्यान, मन पर नियंत्रण और आत्मसंयम की साधना

श्लोक 5 / 47 · ध्यान योग (आत्मसंयम)

उद्धरेदात्मनात्માનં નાત્માનમવસાદયેત્।
આત્મૈવ હ્યાત્મનો બન્ધુરાત્મૈવ રિપુરાત્મનઃ॥

uddhared ātmanātmānaṁ nātmānam avasādayet | ātmaiva hyātmano bandhur ātmaiva ripur ātmanaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

मनुष्य को अपने मन द्वारा अपना उद्धार करना चाहिए, स्वयं का पतन नहीं। क्योंकि मनुष्य का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र है और वही उसका सबसे बड़ा शत्रु है।

🎯 आज के जीवन के लिए व्यावहारिक सीख

अपनी असफलता या दुःखों के लिए दूसरों को दोष देना बंद कीजिए।
अनुशासित मन आपका सबसे वफादार और शक्तिशाली मित्र साबित होगा।
लेकिन अनियंत्रित मन ही आपका सबसे खतरनाक शत्रु बनकर आपको गिरा सकता है।
प्रतिदिन अपने विचारों को प्रशिक्षित करें और अपने सबसे बड़े समर्थक बनें।