अध्याय 13 35 कुल श्लोक

Kshetra Kshetragya Vibhaga Yoga

The Yoga of Discerning the Field and Knower

श्लोक 1 / 35 · Kshetra Kshetragya Vibhaga Yoga

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣhu kadāchana | mā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo ’stvakarmaṇi

📖 सरल हिंदी अर्थ

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फलों पर कभी नहीं। इसलिए कर्म के फल की इच्छा से कर्म मत करो और न ही अकर्मण्यता में आसक्त होओ।

🎯 आज के जीवन के लिए व्यावहारिक सीख

परिणाम की व्यर्थ चिंता में अपना आज का दिन और मानसिक शांति न गंवाएं।
अपना 100% ध्यान और ऊर्जा सिर्फ अपनी वर्तमान मेहनत और प्रक्रिया पर लगाएं।
जब आप अपने कर्म में सर्वश्रेष्ठ होंगे, तो सफलता स्वयं आपके कदम चूमेगी।
भविष्य के भय को अलविदा कहें, वर्तमान में जिएं और आत्मविश्वास से आगे बढ़ें।