वैदिक समय गणना · दैनिक पंचांग एवं चौघड़िया

आज का चौघड़िया और पंचांग

वाराणसी (काशी) · शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

सूर्योदय
05:56 AM
सूर्यास्त
05:30 PM
दिनमान
11 घंटे 34 मिनट
रात्रिमान
12 घंटे 26 मिनट

वाराणसी (काशी) का चौघड़िया — 24 घंटे की संपूर्ण समय सारणी

अमृत, शुभ और लाभ श्रेष्ठ हैं। चल मध्यम है। उद्वेग, काल और रोग में शुभ कार्य वर्जित हैं।

#1 · दिन अशुभ (हानिकारक)

काल

स्वामी ग्रह: शनि देव

05:56 AM - 07:23 AM
87 मिनट
उपयोग: मशीनरी कार्य या शनि साधना, शुभ कार्य न करें
#2 · दिन शुभ

शुभ

स्वामी ग्रह: बृहस्पति (गुरु)

07:23 AM - 08:49 AM
87 मिनट
उपयोग: विवाह, गृह प्रवेश, शिक्षा, धार्मिक कार्य
#3 · दिन अशुभ (रोगकारक)

रोग

स्वामी ग्रह: मंगल देव

08:49 AM - 10:16 AM
87 मिनट
उपयोग: शत्रु पराजय या कोर्ट तैयारी, शुभ कार्य वर्जित
#4 · दिन अशुभ (चिंताजनक)

उद्वेग

स्वामी ग्रह: सूर्य देव

10:16 AM - 11:43 AM
87 मिनट
उपयोग: सरकारी काम को छोड़कर शुभ कार्य टालें
#5 · दिन मध्यम / चल

चल

स्वामी ग्रह: शुक्र देव

11:43 AM - 01:10 PM
87 मिनट
उपयोग: यात्रा, परिवहन, स्थानांतरણ, सामान्य कार्य
#6 · दिन शुभ (लाभकारी)

लाभ

स्वामी ग्रह: बुध देव

01:10 PM - 02:37 PM
87 मिनट
उपयोग: व्यापार, दुकान उद्घाटन, निवेश, खरीदारी
#7 · दिन शुभ (सर्वोत्तम)

अमृत

स्वामी ग्रह: चंद्र देव

02:37 PM - 04:03 PM
87 मिनट
उपयोग: नई शुरुआत, पूजा-पाठ, दस्तावेज, यात्रा
#8 · दिन अशुभ (हानिकारक)

काल

स्वामी ग्रह: शनि देव

04:03 PM - 05:30 PM
87 मिनट
उपयोग: मशीनरी कार्य या शनि साधना, शुभ कार्य न करें
#1 · रात्रि शुभ (लाभकारी)

लाभ

स्वामी ग्रह: बुध देव

05:30 PM - 07:03 PM
93 मिनट
उपयोग: व्यापार, दुकान उद्घाटन, निवेश, खरीदारी
#2 · रात्रि अशुभ (चिंताजनक)

उद्वेग

स्वामी ग्रह: सूर्य देव

07:03 PM - 08:37 PM
93 मिनट
उपयोग: सरकारी काम को छोड़कर शुभ कार्य टालें
#3 · रात्रि शुभ

शुभ

स्वामी ग्रह: बृहस्पति (गुरु)

08:37 PM - 10:10 PM
93 मिनट
उपयोग: विवाह, गृह प्रवेश, शिक्षा, धार्मिक कार्य
#4 · रात्रि शुभ (सर्वोत्तम)

अमृत

स्वामी ग्रह: चंद्र देव

10:10 PM - 11:43 PM
93 मिनट
उपयोग: नई शुरुआत, पूजा-पाठ, दस्तावेज, यात्रा
#5 · रात्रि मध्यम / चल

चल

स्वामी ग्रह: शुक्र देव

11:43 PM - 01:17 AM
93 मिनट
उपयोग: यात्रा, परिवहन, स्थानांतरણ, सामान्य कार्य
#6 · रात्रि अशुभ (रोगकारक)

रोग

स्वामी ग्रह: मंगल देव

01:17 AM - 02:50 AM
93 मिनट
उपयोग: शत्रु पराजय या कोर्ट तैयारी, शुभ कार्य वर्जित
#7 · रात्रि अशुभ (हानिकारक)

काल

स्वामी ग्रह: शनि देव

02:50 AM - 04:23 AM
93 मिनट
उपयोग: मशीनरी कार्य या शनि साधना, शुभ कार्य न करें
#8 · रात्रि शुभ (लाभकारी)

लाभ

स्वामी ग्रह: बुध देव

04:23 AM - 05:56 AM
93 मिनट
उपयोग: व्यापार, दुकान उद्घाटन, निवेश, खरीदारी
विशेष कालखंड

शुभ मुहूर्त और राहु काल (अशुभ समय)

किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व अभिजीत मुहूर्त का लाभ लें व राहु काल से बचें।

शुभ मुहूर्त

नई शुरुआत, खरीदारी और पूजन के लिए श्रेष्ठ समय

अभिजीत मुहूर्त

सर्वोत्तम

दिन का सर्वाधिक शुभ समय। किसी भी शुभ कार्य या यात्रा के लिए अत्यंत कल्याणकारी।

11:20 AM - 12:06 PM

ब्रह्म मुहूर्त

साधना काल

ईश्वर भक्ति, योग, ध्यान और अध्ययन के लिए अमृतवेला।

04:20 AM - 05:08 AM

विजय मुहूर्त

सफलता दायक

इंटरव्यू, व्यापारिक डील या महत्वपूर्ण कार्यों में विजय प्राप्ति के लिए उत्तम।

01:39 PM - 02:25 PM

गोधूलि मुहूर्त

संध्या पूजन

संध्या आरती, दीप प्रज्वलन और माता लक्ष्मी के पूजन के लिए कल्याणकारी।

05:15 PM - 05:45 PM

अमृत काल

अमृत काल

नक्षत्र आधारित अमृत काल, कार्य सिद्धि और आशीर्वाद के लिए शुभ।

09:23 PM - 11:15 PM

निशिता मुहूर्त

मध्यरात्रि साधना

मध्यरात्रि की शिव पूजा, तांत्रिक साधना और मंत्र जप का विशिष्ट समय।

11:19 PM - 12:07 AM

अशुभ समय (कार्य टालें)

राहुकाल और यमगण्ड में नया काम या यात्रा न करें

राहु काल

अशुभ काल

राहुकाल में नया काम, यात्रा या कोई बड़ा आर्थिक सौदा आरंभ न करें।

08:49 AM - 10:16 AM

यमगण्ड काल

हानिकर

यमगण्ड काल में किए गए कार्यों में बाधाओं व असफलता का भय रहता है।

01:10 PM - 02:37 PM

गुलिक काल

कष्टप्रद

गुलिक काल में मांगलिक कार्य टालना ही श्रेयस्कर माना जाता है।

05:56 AM - 07:23 AM
पंचांग सलाह: यदि अत्यंत आवश्यक कार्य राहु काल में करना ही पड़े, तो भगवान श्री गणेश जी का स्मरण कर, जल पीकर या गुड़ खाकर प्रस्थान करना शास्त्रसम्मत उपाय है।
पंचांग के पांच अंग

आज का दैनिक पंचांग

वाराणसी (काशी) · शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

तिथि
सप्तमी · शुक्ल पक्ष
वार
शनिवार
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा चरण 3
योग
शूल
करण
गर

चौघड़िया और मुहूर्त से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चौघड़िया क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?

चौघड़िया वैदिक ज्योतिष की समय प्रणाली है, जिसमें दिन और रात को 8-8 बराबर भागों में बांटा जाता है। इसमें अमृत, रोग, लाभ, शुभ, चल, काल और उद्वेग क्रमशः आते हैं।

किस चौघड़िया में कौन सा कार्य करना श्रेष्ठ है?

अमृत और शुभ में धार्मिक कार्य, विवाह और गृह प्रवेश सर्वोत्तम हैं। लाभ में व्यापार, दुकान और खरीदारी शुभ है। चल में यात्रा करें। उद्वेग, काल और रोग में शुभ कार्य न करें।

अभिजीत मुहूर्त का क्या महत्व है?

अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय आता है। भगवान विष्णु का यह प्रिय मुहूर्त सभी दोषों को शांत कर कार्य में विजय दिलाता है।

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

राहु काल में कोई नया सौदा, विवाह वार्ता, गृह प्रवेश या यात्रा आरंभ न करें। जो काम पहले से चल रहा हो, वह जारी रख सकते हैं।

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