आज का चौघड़िया और पंचांग
जयपुर · सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
जयपुर का चौघड़िया — 24 घंटे की संपूर्ण समय सारणी
अमृत, शुभ और लाभ श्रेष्ठ हैं। चल मध्यम है। उद्वेग, काल और रोग में शुभ कार्य वर्जित हैं।
अमृत
स्वामी ग्रह: चंद्र देव
काल
स्वामी ग्रह: शनि देव
शुभ
स्वामी ग्रह: बृहस्पति (गुरु)
रोग
स्वामी ग्रह: मंगल देव
उद्वेग
स्वामी ग्रह: सूर्य देव
चल
स्वामी ग्रह: शुक्र देव
लाभ
स्वामी ग्रह: बुध देव
अमृत
स्वामी ग्रह: चंद्र देव
चल
स्वामी ग्रह: शुक्र देव
रोग
स्वामी ग्रह: मंगल देव
काल
स्वामी ग्रह: शनि देव
लाभ
स्वामी ग्रह: बुध देव
उद्वेग
स्वामी ग्रह: सूर्य देव
शुभ
स्वामी ग्रह: बृहस्पति (गुरु)
अमृत
स्वामी ग्रह: चंद्र देव
चल
स्वामी ग्रह: शुक्र देव
शुभ मुहूर्त और राहु काल (अशुभ समय)
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व अभिजीत मुहूर्त का लाभ लें व राहु काल से बचें।
शुभ मुहूर्त
नई शुरुआत, खरीदारी और पूजन के लिए श्रेष्ठ समय
अभिजीत मुहूर्त
सर्वोत्तमदिन का सर्वाधिक शुभ समय। किसी भी शुभ कार्य या यात्रा के लिए अत्यंत कल्याणकारी।
ब्रह्म मुहूर्त
साधना कालईश्वर भक्ति, योग, ध्यान और अध्ययन के लिए अमृतवेला।
विजय मुहूर्त
सफलता दायकइंटरव्यू, व्यापारिक डील या महत्वपूर्ण कार्यों में विजय प्राप्ति के लिए उत्तम।
गोधूलि मुहूर्त
संध्या पूजनसंध्या आरती, दीप प्रज्वलन और माता लक्ष्मी के पूजन के लिए कल्याणकारी।
अमृत काल
अमृत कालनक्षत्र आधारित अमृत काल, कार्य सिद्धि और आशीर्वाद के लिए शुभ।
निशिता मुहूर्त
मध्यरात्रि साधनामध्यरात्रि की शिव पूजा, तांत्रिक साधना और मंत्र जप का विशिष्ट समय।
अशुभ समय (कार्य टालें)
राहुकाल और यमगण्ड में नया काम या यात्रा न करें
राहु काल
अशुभ कालराहुकाल में नया काम, यात्रा या कोई बड़ा आर्थिक सौदा आरंभ न करें।
यमगण्ड काल
हानिकरयमगण्ड काल में किए गए कार्यों में बाधाओं व असफलता का भय रहता है।
गुलिक काल
कष्टप्रदगुलिक काल में मांगलिक कार्य टालना ही श्रेयस्कर माना जाता है।
आज का दैनिक पंचांग
जयपुर · सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
चौघड़िया और मुहूर्त से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चौघड़िया क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?
चौघड़िया वैदिक ज्योतिष की समय प्रणाली है, जिसमें दिन और रात को 8-8 बराबर भागों में बांटा जाता है। इसमें अमृत, रोग, लाभ, शुभ, चल, काल और उद्वेग क्रमशः आते हैं।
किस चौघड़िया में कौन सा कार्य करना श्रेष्ठ है?
अमृत और शुभ में धार्मिक कार्य, विवाह और गृह प्रवेश सर्वोत्तम हैं। लाभ में व्यापार, दुकान और खरीदारी शुभ है। चल में यात्रा करें। उद्वेग, काल और रोग में शुभ कार्य न करें।
अभिजीत मुहूर्त का क्या महत्व है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय आता है। भगवान विष्णु का यह प्रिय मुहूर्त सभी दोषों को शांत कर कार्य में विजय दिलाता है।
राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
राहु काल में कोई नया सौदा, विवाह वार्ता, गृह प्रवेश या यात्रा आरंभ न करें। जो काम पहले से चल रहा हो, वह जारी रख सकते हैं।
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